संकल्प से सिद्धि तक पहुँचा विश्वकर्मा समाज का मंदिर निर्माण, भगवान श्री विश्वकर्मा पूजन दिवस को बनाया शिल्पोत्सव
17 सितंबर भगवान विश्वकर्मा पूजन दिवस को बनाया शिल्पोत्सव
भव्य शोभायात्रा, सामूहिक पूजन, सृजन शिल्प प्रतियोगिता और सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने बांधा समां
बरही/कटनी। भगवान श्री विश्वकर्मा पूजन दिवस के अवसर पर बरही स्थित विजयनाथ धाम में आयोजित शिल्पोत्सव श्रद्धा, सामाजिक एकता, सेवा और संस्कृति के रंगों से सराबोर होकर भव्य रूप से संपन्न हुआ। आयोजन में बरही सहित कटनी एवं आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में सामाजिक बंधुओं, युवाओं, मातृशक्ति एवं जनमानस की उपस्थिति रही।
1990 के संकल्प से मंदिर निर्माण तक का सफर
विश्वकर्मा समाज के लिए यह आयोजन विशेष महत्व रखता है। वर्ष 1990 में देखे गए मंदिर निर्माण के संकल्प को वर्तमान नवयुवक मंडल ने वर्षों के अथक परिश्रम, संघर्ष और समर्पण से साकार किया। वर्ष 2018 से शुरू हुई मंदिर निर्माण की यात्रा अनेक चुनौतियों के बीच आगे बढ़ी और आज भव्य मंदिर समाज को समर्पित किया गया।

मंदिर निर्माण में विशेष योगदान देने वाले समाज के गौरव श्री राममिलन विश्वकर्मा, कोषाध्यक्ष श्री अच्छे लाल विश्वकर्मा, प्रदेश सचिव श्री जमुना प्रसाद विश्वकर्मा, प्रदेश उपाध्यक्ष श्री हरकेश विश्वकर्मा, कार्यकारिणी अध्यक्ष श्री संजीव विश्वकर्मा एवं सह-कोषाध्यक्ष श्री आशीष विश्वकर्मा सहित अनेक कार्यकर्ताओं के योगदान को कार्यक्रम में विशेष रूप से सराहा गया।
अतिथियों ने की मंदिर की भव्यता की सराहना
कार्यक्रम में पहुंचे मुख्य अतिथि श्री अशोक विश्वकर्मा जी जिला पंचायत उपाध्यक्ष एवं विशिष्ट अतिथि के रूप में नगरपालिका अध्यक्ष श्री पीयूष अग्रवाल सहित नगरपालिका के पार्षदगण उपस्थित रहे। अतिथियों ने नव-निर्मित भगवान श्री विश्वकर्मा मंदिर की भव्यता, सुंदरता और वास्तुशिल्प की विशेष सराहना की।

मंदिर की अद्भुत कलात्मक संरचना एवं निर्माण की बारीकियों को देखकर अतिथियों ने विश्वकर्मा समाज का अभिवादन करते हुए कहा कि मंदिर की कलात्मकता और निर्माण को देखकर ऐसा प्रतीत होता है, मानो भगवान श्री विश्वकर्मा स्वयं इस निर्माण को दिशा प्रदान कर रहे हों।
अतिथियों ने समाज की एकजुटता, वर्षों के परिश्रम और नवयुवाओं के समर्पण की भी प्रशंसा की।
वर्षों के संघर्ष ने दिया “शिल्पोत्सव” को नया स्वरूप
विगत कई वर्षों से समाज के युवाओं द्वारा प्रत्येक वर्ष नए रचनात्मक विचारों और सामाजिक जागरूकता के साथ कार्यक्रम को नया स्वरूप दिया गया। “संकल्प से सिद्धि तक” की इसी यात्रा में बुजुर्ग सम्मान की परंपरा के साथ युवाओं की प्रतिभा को मंच देने का प्रयास किया गया।
समाज सेवा के उद्देश्य से रक्तदान, युवाओं की रचनात्मक प्रतिभा को सामने लाने के लिए सृजन शिल्प प्रतियोगिता, सामूहिक भगवान विश्वकर्मा पूजन तथा सामाजिक जागरूकता के अनेक कार्यक्रम आयोजित किए गए।
सृजन शिल्प प्रतियोगिता के माध्यम से पारंपरिक औजारों और विश्वकर्मा समाज की समृद्ध शिल्प परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास किया गया। वहीं बेटियों के निःशुल्क विवाह जैसे सामाजिक आयोजनों के माध्यम से सेवा एवं महिला सशक्तिकरण का संदेश दिया गया।
वरिष्ठजनों की उपस्थिति में कार्यकर्ताओं का सम्मान
कार्यक्रम में पुरानी समिति के अध्यक्ष श्री विष्णु विश्वकर्मा, श्री रामसुजन विश्वकर्मा, श्री दादौली विश्वकर्मा, श्री रामसखा विश्वकर्मा, श्री रामभुवन विश्वकर्मा, श्री हजारी लाल विश्वकर्मा, पुजारी श्री चन्द्रबली विश्वकर्मा एवं श्री रामफल विश्वकर्मा सहित अनेक सक्रिय कार्यकर्ताओं की उपस्थिति रही।

वरिष्ठ सदस्यों ने मंदिर निर्माण से जुड़े सभी परिश्रमी कार्यकर्ताओं का आभार व्यक्त किया। संस्था की ओर से मंदिर निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले कार्यकर्ताओं को मोमेंटो प्रदान कर सम्मानित किया गया। जिसमें विशेष मंदिर निर्माण के सहयोग के लिए श्री अच्छेलाल जी और आशुतोष विश्वकर्मा को गोल्ड मेडल प्रदान किया गया।।
कटनी, उमरिया, सतना और उत्तरप्रदेश से भी पहुंचे सामाजिक बंधु,
वहीं बरही से जुड़े उमरिया, कटनी, सतना जिले के विश्वकर्मा समाज की टीम का भी आत्मीय स्वागत किया गया। कार्यक्रम में कक्षा 10वीं एवं 12वीं के प्रतिभावान छात्र-छात्राओं को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।
पूजन के बाद निकली भव्य शोभायात्रा
कार्यक्रम की शुरुआत भगवान श्री विश्वकर्मा जी के पूजन एवं अभिषेक से हुई। इसके बाद सृजन शिल्प प्रतियोगिता आयोजित की गई। प्रतियोगिता के पश्चात भगवान श्री विश्वकर्मा की दिव्य झांकी के साथ ढोल-नगाड़ों से सुसज्जित भव्य शोभायात्रा निकाली गई।

शोभायात्रा विजयनाथ धाम से कमानिया गेट, आजाद चौक, विश्वकर्मा मोहल्ला होते हुए पुनः भगवान श्री विश्वकर्मा मंदिर, विजयनाथ धाम बरही पहुंचकर संपन्न हुई।
समाज की दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए कार्यक्रम में दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
भारतीय म्यूजिकल आर्केस्ट्रा ने बांधा समां
इसके पश्चात भारतीय म्यूजिकल आर्केस्ट्रा द्वारा रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी गईं। गीत-संगीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम की भव्यता को और बढ़ा दिया। बड़ी संख्या में उपस्थित लोगों ने कार्यक्रम का आनंद लिया।
इन कर्मठ कार्यकर्ताओं ने संभाली आयोजन की जिम्मेदारी
शिल्पोत्सव की सफलता में विश्वकर्मा समाजोत्थान संघ एवं शिक्षा समिति तथा नवयुवक मंडल के पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

प्रमुख रूप से श्री केशव, कमलेश, कौशल, जानकी, सुनील, काशीराम, शिवकुमार, दशरथ, राकेश, अमित, हरीश, रामनरेश, पिंटू, अमृतलाल, धनीराम, कंछेदी लाल, उत्तम, विजय, विनोद, कैलाश, पुष्पेंद्र, संजय, भरत, सुरेश, राजेंद्र, चंद्रभान, गोवर्धन, पुरुषोत्तम, दुर्गा, कुबेर, दुर्योधन, बाल गोविंद, संतोष, कृष्ण, बब्बू अशोक, लखन, जुगल, जमुना, दीपक, शिवचरण, संत दयाल, रामाधीन, चंद्रशेखर, सत्येंद्र, नीलेंद्र, रामकिशोर, सुखबदन, सुखनंदन, मुकेश, प्रदीप, दिलीप, श्यामू, देशराज, घनश्याम, गया रामगोपाल, रवि, बाला प्रसाद, शिवनारायण, मनीष, दिनेश, संतराम, अनिल, रामदयाल, विपिन, नरोत्तम, रमाशंकर, आशु, अवधेश, रामरईस, भुवनेश्वर, प्रकाश, सोनेलाल, बलदेव, नंदीलाल, उमादत, गणेश, मंगल, रमेश एवं सुंदर सहित अनेक सामाजिक कार्यकर्ताओं ने आयोजन को सफल बनाने में योगदान दिया।
“संकल्प से सिद्धि तक” बनी आयोजन की पहचान
शिल्पोत्सव केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि वर्षों के संकल्प, संघर्ष, सेवा, समर्पण और सामाजिक एकजुटता का परिणाम बनकर सामने आया। मंदिर निर्माण से लेकर सामाजिक जागरूकता, युवा प्रतिभाओं को मंच, वरिष्ठजनों का सम्मान और सेवा कार्यों तक की यह यात्रा विश्वकर्मा समाज की सामूहिक शक्ति को प्रदर्शित करती है।
शिल्पोत्सव का संदेश रहा—
“संकल्प से सिद्धि तक… आस्था से विकास तक।”
संवाददाता — जानकी प्रसाद विश्वकर्मा
अदृश्य शक्ति न्यूज़