ऑपरेशन मुस्कान: 104 दिनों का रहस्यमयी सन्नाटा और फिर… दहलीज पर लौटी खुशियां!

मुख्य संवाददाता: राजेश विश्वकर्मा
निवार/कटनी: वह 7 जनवरी की सर्द सुबह थी, जब निवार पहाड़ी की एक मां की दुनिया अचानक उजड़ गई। बिना किसी आहट, बिना किसी सुराग के उसकी बेटी ओझल हो चुकी थी। क्या वह किसी साये की गिरफ्त में थी? या फिर किसी अनहोनी का शिकार? 104 दिनों तक सस्पेंस की यह चादर निवार की गलियों में लिपटी रही, लेकिन ‘ऑपरेशन मुस्कान’ के जांबाजों ने हार नहीं मानी।
खामोश गायब होना और पुलिस का जाल
माधवनगर थाना क्षेत्र के चौकी निवार में जब संजी बाई ने अपनी बेटी की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई, तो मामला किसी पेचीदा पहेली जैसा था। पुलिस अधीक्षक श्री अभिनव विश्वकर्मा के सख्त निर्देशों के बाद, नगर पुलिस अधीक्षक नेहा पच्चीसिया और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक डॉ. संतोष डेहरिया ने इस ‘अदृश्य’ चुनौती को स्वीकार किया।
दहशत के दिन, राहत की रात
दिन बीतते गए और सस्पेंस गहराता गया। पुलिस की टीम साये की तरह सुरागों का पीछा कर रही थी। आखिरकार, 20 अप्रैल 2026 को उस वक्त सारा रहस्य खत्म हो गया जब माधवनगर पुलिस की टीम ने गुमशुदा बालिका को ट्रैक कर लिया।
”जब पुलिस बालिका को सुरक्षित लेकर लौटी, तो मां के चेहरे पर 104 दिनों से जमी आंसुओं की परत मुस्कान में तब्दील हो गई। यह सिर्फ एक दस्तयाबी नहीं, बल्कि खाकी के प्रति अटूट विश्वास की जीत थी।”
इन ‘सुपरकॉप्स’ ने सुलझाई गुत्थी
इस पूरे ऑपरेशन को अंजाम देने में इन अधिकारियों और जवानों ने निभाई अहम भूमिका:
- संजय दुबे: थाना प्रभारी, माधवनगर
- अंजनी मिश्र: चौकी प्रभारी, निवार
- कमलेश्वर शुक्ला: विशेष मार्गदर्शन
- जांबाज टीम: प्र.आर. मनीष, आरक्षक गौरव, अरविन्द कुशवाहा और बकिल यादव।
अदृश्य शक्ति न्यूज़ के लिए जबलपुर संभाग चीफ राजेश विश्वकर्मा की खास रिपोर्ट।