धान उपार्जन केंद्रों पर आवश्‍यक जानकारी पोर्टल पर अपलोड करने में लापरवाही बरतने पर दो खरीदी केन्‍द्र प्रभारी एवं दो कम्प्‍यूटर ऑपरेटर समेत 4 को कारण बताओ नोटिस जारी

जानकारी पोर्टल पर अपलोड करने में लापरवाही बरतने पर दो खरीदी केन्‍द्र प्रभारी एवं दो कम्प्‍यूटर ऑपरेटर समेत 4 को कारण बताओ नोटिस जारी🔳कटनी – खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में उपार्जन केन्‍द्रों पर आवश्‍यक सुविधाओं की जानकारी ऑनलाईन पोर्टल पर अपलोड करने में लापरवाही बरतने पर कलेक्‍टर श्री आशीष तिवारी के निर्देश पर धान उपार्जन केन्द्र कछारगांव के खरीदी प्रभारी एवं कम्‍प्‍यूटर ऑपरेटर एवं धान उपार्जन केन्द्र खमतरा के खरीदी प्रभारी और कम्‍प्‍यूटर ऑपरेटर सहित 4 लोगों को कारण बताओ नोटिस जारी कर 3 दिन में जवाब मांगा गया है।*इन्‍हें मिला नोटिस*

जिला आपूर्ति अधिकारी सज्‍जन सिंह परिहार ने बताया कि उपार्जन केंद्रों के निर्धारण के बाद उपार्जन केन्द्र कछारगांव केन्द्र कोड (59342194) के खरीदी प्रभारी श्री रघुवीर सिंह बागरी और कम्प्यूटर ऑपरेटर श्री अशोक मेहरा तथा धान उपार्जन केन्‍द्र खमतरा केन्द्र कोड (59342178) के खरीदी प्रभारी श्री दीनदयाल त्रिपाठी और कम्‍प्‍यूटर ऑपरेटर श्री ललित प्‍यासी को केंद्र पर उपलब्ध 16 आवश्यक सुविधाओं की जानकारी उपार्जन केंद्र प्रभारी के लॉगिन से भारत सरकार के पोर्टल http://pcsap.in पर दर्ज करने का निर्देश दिया गया था। परंतु पोर्टल पर निम्न गुणवत्ता के फोटोग्राफ्स अपलोड किए गये, जिसके कारण केंद्र की ग्रेडिंग ‘लेवल-1’ परिलक्षित हो रही है। इन दोनों खरीदी प्रभारियों एवं कम्‍प्‍यूटर ऑपरेटर को पूर्व में भी PCSAP पोर्टल पर फोटोग्राफ्स अपलोड करने के संबंध में प्रशिक्षण दिया जा चुका है और समय-समय पर आयोजित बैठकों में भी निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद, निर्देशों की अवहेलना करते हुए पोर्टल पर सही जानकारी अपलोड नहीं की गई। जो कि मध्य प्रदेश शासन, खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग द्वारा जारी उपार्जन नीति के प्रावधानों का स्पष्ट उल्लंघन है। जिला आपूर्ति अधिकारी ने इन चारों को कारण बताओ सूचना पत्र जारी करते हुये कहा है कि क्‍यों न आपको आगामी खरीदी कार्य से ब्‍लैक लिस्‍टेड करने की कार्यवाही की जाय। साथ ही इसका उत्तर 3 दिवस के अन्दर समक्ष में प्रस्तुत करने के निर्देश दिये हैं। नोटिस में कहा गया है कि नियत अवधि के अंदर उत्तर प्रस्तुत नहीं करने की दशा में यह माना जावेगा कि अधिरोपित आरोप स्वीकार हैं। तदानुसार एक पक्षीय कार्यवाही

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