Katni 32°C | Wednesday, 1 April 2026

बंगाल में ‘खेला’ 2.0: क्या ममता बनर्जी बचा पाएंगी अपना किला या शुभेंदु अधिकारी रचेंगे इतिहास?

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पूरे देश की नजरों में है। यह न सिर्फ ममता बनर्जी की तीसरी बार सत्ता बचाने की लड़ाई है, बल्कि शुभेंदु अधिकारी जैसे पूर्व सहयोगी के नेतृत्व में बीजेपी का इतिहास रचने का प्रयास भी। चुनाव दो चरणों में होंगे—23 अप्रैल को 152 सीटों पर और 29 अप्रैल को 142 सीटों पर। वोटों की गिनती 4 मई को होगी। कुल 294 सीटों वाली विधानसभा में बहुमत के लिए 148 सीटें चाहिएं।

grok image 1774986144859 बंगाल में 'खेला' 2.0: क्या ममता बनर्जी बचा पाएंगी अपना किला या शुभेंदु अधिकारी रचेंगे इतिहास?


2021 के चुनाव में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने 215 सीटें जीती थीं (लगभग 48% वोट शेयर), जबकि बीजेपी 77 सीटों पर सिमट गई थी (38% वोट शेयर)। अब स्थिति अलग है। टीएमसी तीन बार सत्ता में रहने के बाद एंटी-इनकंबेंसी से जूझ रही है, जबकि बीजेपी संगठन को मजबूत करने और बूथ-लेवल विस्तार पर जोर दे रही है। वोटर लिस्ट का विवाद, उम्मीदवारों की लिस्ट और प्रमुख चेहरों की टक्कर इस चुनाव को और रोचक बना रही है।6a54e8
चुनावी शेड्यूल और प्रक्रिया
चुनाव आयोग ने दो चरणों का फैसला लिया, जो 2021 के 8 चरणों से काफी कम है। पहले चरण की अधिसूचना 30 मार्च को, नामांकन की आखिरी तारीख 6 अप्रैल, जांच 7 अप्रैल और नाम वापसी 9 अप्रैल तक। दूसरे चरण की अधिसूचना 2 अप्रैल को, नामांकन 9 अप्रैल तक और वापसी 13 अप्रैल तक। कुल 80,719 पोलिंग स्टेशनों पर वेबकास्टिंग होगी।
वोटर लिस्ट में बड़ा विवाद है। स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के बाद वोटरों की संख्या 7.66 करोड़ से घटकर 7.04 करोड़ रह गई। 62 लाख से ज्यादा नाम हटाए गए और 60 लाख नाम अभी “अंडर एडजुडिकेशन” में हैं। कांग्रेस ने 60 लाख संदिग्ध मतदाताओं की जांच की मांग की है। टीएमसी इसे बीजेपी-समर्थित “वोटर कटौती” बता रही है, जबकि बीजेपी साफ-सुथरी लिस्ट की वकालत कर रही है। कई बंगाली प्रवासी वोट डालने लौट रहे हैं। यह मुद्दा टीएमसी के लिए “बंगाल विरोधी” नैरेटिव बनाने का हथियार बन गया है, जबकि बीजेपी इसे फेयर इलेक्शन का हिस्सा बता रही है।
टीएमसी की रणनीति: ममता का किला बचाना
टीएमसी ने 291 सीटों पर उम्मीदवार घोषित कर दिए (बाकी तीन पहाड़ी सीटें BGPM को)। ममता बनर्जी ने 74 बैठे विधायकों को टिकट नहीं दिया, नई चेहरों को मौका दिया और महिला, SC/ST तथा अल्पसंख्यक प्रतिनिधित्व पर जोर दिया। ममता खुद भवानीपुर (भभानीपुर) से लड़ रही हैं। उन्होंने 226+ सीटों का टारगेट रखा है और विपक्ष से “बंगाल के लिए वोट” की अपील की।
टीएमसी का फोकस “बंगाली अस्मिता”, “परिवर्तन” और केंद्र सरकार के खिलाफ “बंगाल विरोध” पर है। ममता एंटी-इनकंबेंसी को कम करने के लिए फ्रेश फेस और लोकल इश्यूज पर दांव खेल रही हैं। 2021 में नंदीग्राम में शुभेंदु से हार के बावजूद वे बाईपोल से भवानीपुर पहुंची थीं। अब वहां फिर से लड़ाई है।
बीजेपी की रणनीति: शुभेंदु का इतिहास रचने का दांव
बीजेपी ने पहले चरण के लिए 144 उम्मीदवारों की लिस्ट जारी की। शुभेंदु अधिकारी (नेता प्रतिपक्ष) नंदीग्राम (जहां उन्होंने 2021 में ममता को हराया था) और भवानीपुर दोनों से लड़ रहे हैं। यह बीजेपी का सिग्नल है कि शुभेंदु चेहरा हैं। अन्य प्रमुख उम्मीदवारों में दिलीप घोष (खड़गपुर सदर), अग्निमित्र पॉल आदि शामिल हैं।
बीजेपी का नैरेटिव “परिवर्तन”, भ्रष्टाचार विरोध, विकास और हिंदू अस्मिता पर आधारित है। पार्टी ने 2021 की 77 सीटों को आधार बनाकर बूथ-लेवल संगठन मजबूत किया है। 57 सीटें जहां 2021 में 8,000 वोटों से कम अंतर था, उन पर फोकस है। सुकांत मजूमदार जैसे नेता डेमोग्राफिक चेंज का मुद्दा उठा रहे हैं।
बड़ी खबर: 31 मार्च 2026 को भारतीय टेनिस लीजेंड लिएंडर पेस बीजेपी में शामिल हो गए। उन्होंने युवा और शहरी वोटर्स को आकर्षित करने की उम्मीद जताई। पेस का जोड़ना बीजेपी को स्टार पावर और स्पोर्ट्स बैकग्राउंड वाले वोटर्स के बीच पहुंच बढ़ा सकता है, खासकर कोलकाता जैसे शहरी इलाकों में।
मुख्य मुकाबला: भवानीपुर—ममता बनर्जी vs शुभेंदु अधिकारी
यह चुनाव का सबसे हाई-वोल्टेज मुकाबला है। 2021 में ममता नंदीग्राम में शुभेंदु से 1,956 वोटों से हारी थीं, लेकिन भवानीपुर बाईपोल में उन्होंने भारी जीत दर्ज की। अब शुभेंदु “उनके घर” में घुसकर चुनौती दे रहे हैं। शुभेंदु दावा कर चुके हैं कि वे 20,000 वोटों से जीतेंगे।
भवानीपुर दक्षिण कोलकाता की शहरी सीट है, जहां टीएमसी की पकड़ मजबूत रही है। लेकिन शुभेंदु का संगठनात्मक कौशल और 2021 की जीत का मोमेंटम उन्हें मजबूती दे सकता है। यह टक्कर सिर्फ एक सीट नहीं, बल्कि पूरे बंगाल की राजनीति का प्रतीक है—पुरानी गार्ड (ममता) vs नया चेहरा (शुभेंदु, पूर्व TMC नेता)। अगर शुभेंदु यहां जीतते हैं, तो यह टीएमसी के लिए बड़ा झटका होगा; ममता की जीत उनके किले को मजबूत करेगी।
प्रमुख मुद्दे
वोटर लिस्ट विवाद: 60 लाख नामों का फैसला लंबित। टीएमसी इसे साजिश बता रही, बीजेपी फेयरनेस का दावा कर रही। कई जिलों में नाम कटने से अल्पसंख्यक और प्रवासी वोट प्रभावित हो सकते हैं।
एंटी-इनकंबेंसी vs परिवर्तन: टीएमसी पर भ्रष्टाचार, तुष्टीकरण और प्रशासनिक विफलताओं के आरोप। बीजेपी “अच्छे दिन” और केंद्र की योजनाओं (जैसे PM Awas, Ujjwala) को आगे बढ़ा रही।
डेमोग्राफिक चेंज और अस्मिता: बीजेपी हिंदू वोट को एकजुट करने की कोशिश कर रही। टीएमसी अल्पसंख्यक वोट बैंक पर निर्भर।
युवा और शहरी वोट: लिएंडर पेस का शामिल होना यहां बीजेपी को मदद कर सकता है। बेरोजगारी, शिक्षा और रोजगार बड़े मुद्दे।
विपक्ष की भूमिका: कांग्रेस अकेले लड़ रही (284 उम्मीदवारों की लिस्ट जारी), लेफ्ट फ्रंट भी। लेकिन दोनों कमजोर हैं। वोट शेयर बंटने से टीएमसी को फायदा या नुकसान हो सकता है।
ऐतिहासिक संदर्भ और समीकरण
2011 में ममता ने लेफ्ट को हराकर सत्ता संभाली। 2016 में मजबूत हुईं। 2021 में बीजेपी का उभार हुआ—वोट शेयर 10% से 38% पहुंचा, लेकिन सीटें कम रहीं क्योंकि वोट पोलराइज्ड थे। 2024 लोकसभा में टीएमसी ने 29 सीटें जीतीं, बीजेपी 12 पर। अब असेंबली में बीजेपी 2021 के 77 को पार करने का सपना देख रही।
टीएमसी का वोट बैंक मुख्यतः ग्रामीण, अल्पसंख्यक और कुछ शहरी इलाकों में मजबूत। बीजेपी हिंदू वोट, कुछ ग्रामीण और शहरी युवा पर फोकस कर रही। 57 नंबर वाली “स्विंग” सीटें निर्णायक होंगी। अगर वोटर लिस्ट साफ हुई तो बीजेपी को फायदा हो सकता है।
संभावित परिदृश्य और विश्लेषण
टीएमसी की जीत का केस: अगर ममता भवानीपुर में मजबूत जीत दर्ज करती हैं, एंटी-इनकंबेंसी को मैनेज कर लेती हैं और अल्पसंख्यक वोट एकजुट रहता है, तो 200+ सीटें संभव। ममता का करिश्मा और लोकल कनेक्ट अभी भी मजबूत है।
बीजेपी का उलटफेर: अगर शुभेंदु भवानीपुर में अच्छा प्रदर्शन करते हैं, वोटर लिस्ट विवाद से फायदा मिलता है, युवा/शहरी वोट शिफ्ट होता है और पेस जैसे चेहरे प्रभाव डालते हैं, तो बीजेपी 100-120+ सीटें छू सकती है। शुभेंदु का “ट्रॉफी” बनना बीजेपी के लिए बड़ा बूस्ट।
तिहरा मुकाबला का प्रभाव: कांग्रेस-लेफ्ट वोट बंटने से कुछ सीटों पर टीएमसी को फायदा, कुछ पर बीजेपी को।
बंगाल की राजनीति भावनाओं, अस्मिता और स्थानीय मुद्दों पर चलती है। “खेला” शब्द ममता का नारा रहा, लेकिन अब शुभेंदु और बीजेपी इसे उलटने की कोशिश कर रहे। दो चरणों का चुनाव तेज प्रचार की मांग करेगा—अभिषेक बनर्जी टीएमसी से, शुभेंदु बीजेपी से रैलियां कर रहे हैं।
निष्कर्ष: इतिहास या किला बचाना?
2026 का चुनाव बंगाल की राजनीति में टर्निंग पॉइंट साबित हो सकता है। ममता अगर किला बचाती हैं, तो उनकी विरासत मजबूत होगी। शुभेंदु अगर भवानीपुर में कमाल करते हैं या बीजेपी बड़ी छलांग लगाती है, तो बंगाल में सत्ता परिवर्तन का नया अध्याय लिखा जाएगा।
अभी सब कुछ खुले में है। वोटर लिस्ट का अंतिम फैसला, प्रचार का असर, बूथ मैनेजमेंट और अंतिम दिनों की घटनाएं नतीजे तय करेंगी। बंगाल हमेशा सरप्राइज देता है—2021 में बीजेपी ने जोरदार प्रदर्शन किया लेकिन सत्ता नहीं पाई। 2026 में क्या होगा, यह 23-29 अप्रैल के बीच मतदाता तय करेंगे।

खबर सोशल मीडिया में शेयर करें