अदृश्य शक्ति न्यूज़ 17/12/2025
कटनी। कटनी की आबोहवा में इन दिनों धूल के साथ-साथ सियासत की कड़वाहट भी घुली हुई है। जिला पंचायत उपाध्यक्ष अशोक विश्वकर्मा के ठिकानों पर हुई हालिया आयकर कार्रवाई को शहर के बुद्धिजीवी केवल ‘नियमित जांच’ नहीं मान रहे। इसके पीछे एक गहरा राजनीतिक ‘चक्रव्यूह’ दिखाई दे रहा है, जिसका केंद्र बिंदु ‘कटनी की सत्ता का वर्चस्व’ है।
1. शोक सभा में उमड़ा जनसैलाब और ‘पॉवर सेंटर’ की चिंता
अशोक विश्वकर्मा जी के निवास पर उनकी पूज्य माता जी की शोक सभा में जिस तरह से हर विचारधारा के नेताओं (खासकर विपक्षी खेमे के दिग्गजों) का जमघट लगा, उसने शहर के ‘पुराने सत्ता केंद्रों’ की नींद उड़ा दी है। राजनीति का यह कड़वा सच है कि जब किसी नेता की स्वीकार्यता दलगत सीमाओं को लांघने लगती है, तो उसे ‘अदृश्य हाथों’ द्वारा नियंत्रित करने की कोशिशें शुरू हो जाती हैं।

2. ‘सफेदपोश रसूखदारों’ की साजिश?
शहर के गलियारों में चर्चा है कि यह कार्रवाई उन ‘प्रभावशाली क्षेत्रीय दिग्गजों’ की सोची-समझी रणनीति हो सकती है, जो खुद इन दिनों जांच एजेंसियों के रडार पर हैं।
- जब एक बड़ा बरगद खुद कानूनी झंझावातों में घिरता है, तो वह अक्सर अपने इर्द-गिर्द पनपते ‘नए नेतृत्व’ की जड़ें काटने की कोशिश करता है।
- यह कितना विडंबनापूर्ण है कि जो लोग खुद को ‘जिले का भाग्यविधाता’ समझते हैं, वे अब एक उभरते हुए OBC चेहरे की बढ़ती दावेदारी से इतने असुरक्षित हो गए हैं कि उन्हें ‘ऊपर’ तक अपने संबंधों का इस्तेमाल कर जांच का जाल बिछाना पड़ रहा है।
3. विधायक की कुर्सी और ‘दावेदारी का डर’
कटनी विधानसभा सीट पर दशकों से काबिज ‘स्थापित नेतृत्व’ के लिए अशोक विश्वकर्मा एक बड़ी चुनौती बनकर उभरे हैं। दो बार से निरंतर जिला पंचायत उपाध्यक्ष और पिछड़ा वर्ग मोर्चा के जिलाध्यक्ष के रूप में उनकी सक्रियता ने यह संदेश दे दिया है कि अब परिवर्तन की लहर चल रही है।
“जब सीधे मुकाबले में जीतना मुश्किल हो जाए, तो ‘प्रशासकीय हथियारों’ का इस्तेमाल कर छवि को धूमिल करना सबसे पुराना राजनीतिक हथियार रहा है।”
4. मुख्यमंत्री और दिल्ली दरबार का ‘इस्तेमाल’

इतनी बड़ी कार्रवाई केवल स्थानीय अधिकारियों के बस की बात नहीं है। इसमें निश्चित रूप से उन ‘पहुंच वाले चेहरों’ की भूमिका है जिनकी पैठ भोपाल से लेकर दिल्ली के गलियारों तक है।
- सवाल: क्या अपनी ही पार्टी की सरकार में एक निष्ठावान कार्यकर्ता को इसलिए प्रताड़ित किया जा रहा है क्योंकि उसने शहर के अन्य राजनीतिक दिग्गजों से ‘मधुर संबंध’ रखे?
- मर्म: क्या अब किसी के दुख में शामिल होना या सर्वदलीय संवाद रखना ‘अपराध’ की श्रेणी में आता है?
5. विश्वकर्मा माइनिंग: खानदानी व्यापार पर प्रहार
पूरनलाल विश्वकर्मा जी के जमाने से खड़ा यह माइनिंग साम्राज्य कटनी की अर्थव्यवस्था की रीढ़ रहा है। जब व्यापार दशकों पुराना और पारदर्शी हो, तो उस पर अचानक ऐसी दबिश देना साफ दर्शाता है कि निशाना ‘व्यापार’ नहीं, बल्कि वह ‘राजनीतिक कद’ है जो इस व्यापार की बुनियाद पर खड़ा हुआ है।
जनता का फैसला बाकी है
शोक संतप्त परिवार को ढांढस बंधाने के बजाय, सरकारी अमले को उनके दरवाजे पर खड़ा कर देना कटनी की संस्कृति के खिलाफ है। जिस ‘अदृश्य शक्ति’ ने यह ताना-बाना बुना है, शायद वह भूल गई है कि सहानुभूति की लहर बड़े-बड़े ‘किले’ ढहा देती है। अशोक विश्वकर्मा पर हुआ यह प्रहार उन्हें कमजोर करने के बजाय, जनता की नजरों में एक ‘मजबूत विकल्प’ के रूप में स्थापित कर रहा है।





जो दूसरों के जीवन में उजाला करता है उसके जीवन में कभी अंधेरा नहीं रहता,,, सत्य की हमेशा जीत होती है,,,