🔵 1. संतोष वर्मा कौन हैं?
IAS संतोष वर्मा, मध्य प्रदेश कैडर के वर्ष 2010 बैच के अधिकारी हैं।
वे AJAKS (अखिल भारतीय अनुसूचित जाति–जनजाति अधिकारी कर्मचारी संघ) से लंबे समय से जुड़े रहे हैं और कई बार प्रशासनिक और सामाजिक मुद्दों पर बयान देते रहे हैं।
वर्तमान में उनका विवादित बयान पूरे मध्यप्रदेश में भारी तनाव और आक्रोश का विषय बन गया है।
🔵 2. विवाद कैसे शुरू हुआ?
23 नवंबर 2025 को AJAKS के एक प्रांतीय अधिवेशन में IAS संतोष वर्मा ने एक ऐसा बयान दिया, जिसने समाज को हिला दिया।
ये बयान आरक्षण से जोड़कर दिया गया था, लेकिन इसमें ब्राह्मण समाज की बेटियों पर अभद्र और अनुपयुक्त टिप्पणी शामिल थी।
संतोष वर्मा ने कहा:
“आरक्षण तब तक बना रहना चाहिए, जब तक कोई ब्राह्मण अपनी बेटी मेरे बेटे को दान न कर दे।”
यह बयान सोशल मीडिया पर वायरल होते ही
👉 ब्राह्मण समाज
👉 समाज के विभिन्न वर्ग
👉 महिलाओं के समूह
👉 राजनीतिक संगठनों
ने खुलकर तीखा विरोध दर्ज कराया।
🔵 3. बयान की आग — MP के हर जिले में आंदोलन
इस टिप्पणी के बाद मध्यप्रदेश में आंदोलन तेज़ी से फैल गया।
लगभग हर जिले में:
✔ विरोध रैलियाँ
✔ रोड जाम
✔ कलेक्टर को ज्ञापन
✔ संतोष वर्मा के पुतले दहन
✔ महिलाओं का खुला विरोध
✔ युवाओं के आक्रोशपूर्ण नारे
ज़ोरों पर देखे गए।
प्रमुख बातें:
ब्राह्मण समाज की महिलाएँ पहली बार इतने बड़े स्तर पर सड़कों पर उतरीं।
युवा संगठनों ने बयान को “बेटियों का अपमान” बताया।
कई जगह भीड़ बेकाबू होने की स्थिति में पहुँच गई।
सोशल मीडिया पर समर्थन और गुस्सा रिकॉर्ड स्तर पर है।
🔵 4. इनाम की घोषणा — तनाव और बढ़ा
विरोध का माहौल तब और गरम हुआ जब राष्ट्रीय सनातन सेवा संगठन ने घोषणा की:
“संतोष वर्मा का मुंह काला करने वाले को ₹51,000 का इनाम।”
इसके बाद राजनीतिक मंचों पर स्थिति और विस्फोटक हो गई।
बीजेपी मध्यप्रदेश कार्यसमिति सदस्य राममूर्ति मिश्रा ने
अपने फेसबुक पोस्ट में लिखा:
“जो संतोष वर्मा को गोली मारे, उसे 5 लाख रुपये दूँगा।”
इस पोस्ट ने राजनीति में हलचल मचा दी, और विरोध को अभूतपूर्व गति मिल गई।
🔵 5. राजनीति भी खुलकर मैदान में
यह मुद्दा अब सिर्फ़ सामाजिक नहीं रहा—
नीतिगत और राजनीतिक स्तर पर भी बड़ा बन गया।
मध्यप्रदेश के उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला ने
बयान को “अत्यंत आपत्तिजनक” बताया और
मुख्यमंत्री से तत्काल कार्रवाई की मांग की।
कई अन्य विधायक, जनप्रतिनिधि और सामाजिक संगठन भी खुलकर विरोध में सामने आए।
यह पहली बार था जब सरकार का टॉप लेवल इस विवाद में सीधे तौर पर शामिल हुआ।
🔵 6. प्रशासन की कार्रवाई — पहले नोटिस, फिर निलंबन
विरोध के बढ़ते दबाव को देखते हुए
मध्यप्रदेश सरकार ने सबसे पहले:
✔ एक सप्ताह का कारण बताओ नोटिस जारी किया।
परंतु जब:
हर जिले में सड़कें भर गईं
पुतले जलने लगे
सोशल मीडिया पर आग फैली
महिलाओं के विरोध ने उग्र रूप ले लिया
राजनीतिक दबाव बढ़ा
तब सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए IAS संतोष वर्मा को निलंबित कर दिया।
यह कार्रवाई जनता के आक्रोश और आंदोलन की सफलता का बड़ा संकेत माना जा रहा है।
🔵 7. संतोष वर्मा का माफ़ीनामा — लेकिन देर से
आंदोलन जब चरम पर पहुंच गया, तब संतोष वर्मा ने बयान जारी कर कहा:
“अगर मेरी किसी बात से किसी समाज की भावनाएँ आहत हुई हैं,
तो मैं खेद व्यक्त करता हूँ।”
लेकिन जनता और ब्राह्मण समाज ने इसे “देर से आई मजबूरी की माफी” बताकर खारिज कर दिया।
उनका कहना है:
माफी नहीं,
कड़ी कार्रवाई चाहिए,
और बेटियों के सम्मान पर इस तरह की टिप्पणी किसी भी स्तर पर स्वीकार नहीं।
🔵 8. अभी की स्थिति — क्या माहौल शांत होगा?
भले ही निलंबन हो चुका है,
लेकिन मध्यप्रदेश में तनाव अभी भी बना हुआ है।
कारण:
समाज का आक्रोश अभी शांत नहीं हुआ
महिलाएँ अब इस मुद्दे को सम्मान का प्रश्न मान चुकी हैं
सोशल मीडिया पर दिनभर अभियान चल रहे हैं
कई जिले अभी भी प्रदर्शन की तैयारी में हैं
यानी यह विवाद अभी थमने वाला नहीं है।
🟥 निष्कर्ष — Adrishya Shakti News की टिप्पणी
IAS अधिकारी द्वारा समाज की बेटियों के बारे में दिया गया बयान
एक प्रशासनिक मर्यादा ही नहीं,
बल्कि सामाजिक नैतिकता का भी बड़ा उल्लंघन है।
मध्यप्रदेश का जनआक्रोश बता रहा है कि
अब जनता किसी भी तरह के अपमान को सहन नहीं करेगी।
सरकार की कार्रवाई भले ही हुई है,
पर सवाल अभी बचा है:
क्या यह कार्रवाई जनता के गुस्से को शांत कर पाएगी?
या यह विवाद और बड़ा रूप लेगा?
Adrishya Shakti News इस मामले पर अपनी कड़ी नज़र बनाए हुए है…



